तू है तो
Category: Story
तू है तो
तू है तो सिर्फ एक कहानी नहीं पर एक दास्ताँ है उसकी और उसकी परछाई की जिसे दुनिया मेरी शक्ल से जानती है।
> अंजान सी वो नावाकिफ सा मैं फिर कैसे आज उसके प्यार में लिख रहा हूँ,
> इस सफ़र को बयां करती है हमारी कहानी
> "तू है तो "
> ये कहानी शुरू होती है नजरों के मिलने और नजरों से ही गुफ़्तगू से...
> जिन्हें लगता है कि ये सब फ़िल्मी बातें हैं तो ज़नाब आप नसीब की लाइन मे आखिर में खड़े हैं क्यूंकि नजर के मिलने से प्यार होना अपने आप में एक रहमत है ऊपर वाले की क्योंकि
> जुबां से कहना पड़े वो प्यार ही क्या, मैंने माँ को कभी कहा ही नहीं मैं भूखा हूँ।।
> ये उन दिनों की बात है जब एक खानदानी मजमा लगा था लोग खुशी के मौके पर इक्ट्ठा हुए थे, शादी थी एक ज़नाब की और मेरे लिए तो मसीहा ही रहेगा वो क्योंकि उसकी शादी में मैंने उन्हें पहली मरतबा करीब से देखा।
> मैं बहोत कोस्ता खुद को अगर मैं उस दिन जल्द रवाना हो गया होता क्यूंकि मेरे लिए ये मजमे ख़ास तवज्जो नहीं रखते पर उस दिन के बाद सब बदलने वाला था।
> भीड़ में एक रुहानी खुशबु कमरे में दाखिल हुई,
> मैं बचपन से खुशबुओं के लिए ख़ास लगाव रखता हूँ और मैं उनकी उस खुशबु को आज भी भुला नहीं सकता।
> भीड़ ज़रा छंटी तो यकायक बड़ी बड़ी आंखें लिए एक चहरा सामने आया और उस रब की कसम है कि रूह तक एक तरंग सी दौड़ गई।
> मैंने कभी किसी इंसान को इतने गौर से देखा ही नहीं था पर उस दिन उस लम्हे में मैं रुक सा गया और नज़र हटी ही नहीं।
> वो मेरी रिश्तेदार तो पहले से थीं पर कभी गौर करने का मौका नहीं मिला पर आज क़िस्मत कुछ और ही चाहती थी।
> वो शादी का पहला दौर था और अभी कुछ मौके और आने थे और इस बात से एक खुशी सी मन में दौड़ गयी।
> सभी मौकों पर मिलने के लिए बहोत गर्मजोशी से मैं वहां जाने लगा जहां एक दिन पहले तक मैं जिद में था कि किसी हाल में नहीं जाऊँगा।
> वो अगली बार कब मिलेगी इसी ख्वाब में सो गया उस रात।
> खैर अगला मौक़ा आया मैं वक़्त से पहले तैयार था और दरवाज़े की ओर देखे जा रहा था और आते जाते कुछ लोगों ने टोका भी कि किसका इंजतार है सभी तो हैं यहाँ, पर क्या बताता क्यूँ इतना बेताब हूँ।
> बहोत इंतजार के बाद वो आती दिखीं और यक़ीन करना के खुशी का ठिकाना ना रहा, जैसे भूखे को कोई रोटी देने आरहा हो तो उसकी खुशी सातवे आसमान पर होगी वैसी ही खुशी थी मेरी।
> हुस्न की तारीफ क्या है ज़माने में
> के तुम सा देखा हो तो बयां करे कोई... ❤️
> इतनी सादगी और खूबसूरती बिखेरती हुई जब वो कमरे में दाखिल हुईं तो खुदा क़सम बस यहीं खयाल आया कि दग़ा है किस्मत का सरासर जो वो मेरे महबूब ना हुए.... ।
> नज़र फिर ज़ाम सी हो गयी और बस मैं एक बात कह सकूँ उनसे कुछ सुन सकूँ ये चाहत लिए उन्हें देखता रहा।
> 2-3 मौकों पर कोई ख़ास बात晚 ना हो सक़ी और मायूसी सी चाई रही पर किस्मत ने करवट सी ली और उन्होंने मुझे बड़े अदब और सलीके से कहा - प्लीज़ मेरी एक फोटो क्लिक कर दो....
> उनका मुझे फोटो खींचने के लिए कहना ऐसा लगा जैसे खुद रब ने मुझे अपनी बंदगी का मौका दिया हो और यक़ीन मानना कि मैंने उस मौक़े का के लिए ऊपर वाले को तहे दिल से शुक्रिया किया।
> आप सबको लग रहा होगा कि ज्यादा नाटकीय अंदाज़ हो गया जरा सी बात बताने का पर यकीन मानिये जब आगे आप हमारी कहानी पढ़ेंगे तो आप इस बात से रज़ामंद होंगे के वो मौका क्य़ा ही बेशकीमती मौका था।
> शादी ख़तम होते होते उन्होंने अपना नंबर दिया शादी के दौरान उनकी क्लिक की हुई पिक्चर्स उसने शेयर करने के लिए और तब मैंने टेक्नोलॉजी को दिल से सलाम किया और ख़ुशी के अम्बार पर खड़ा था मैं।
> हमारी कहानी एक भाग में खत्म नहीं होगी ये तो बस शुरुआत है और मैं नहीं चाहता कि आप सब परेशान हो जायें और बीच में पढ़ना छोड़ दें, तो अगला हिस्सा जल्द ही आयेगा और उम्मीद है कि में लिखूँगा और आप पढ़ेंगे अपना क़ीमती व़क्त निकाल कर।
> वैसे मैं जो आज लिख रहा हूँ ये उन्हीं की बात को पूरा कर रहा हूँ और मेरा एक एक लब्ज़ मेरे इश्क़ मेरे महबूब के सदके में एक छोटा सा तोहफ़ा है।
> आप सबसे जल्द मिलूँगा तब तक के लिए सब ख़ैरियत से रहिए और मोहब्बत करते रहिए।
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